कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत की सीमाओं के प्रभावी प्रबंधन को लेकर सरकार की जिम्मेदारी पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि देश में अवैध अप्रवासियों की मौजूदगी व्यवस्था की विफलता को दर्शाती है, जिसे सख्ती और कानून के दायरे में रहकर ठीक किया जाना चाहिए।
सीमा प्रबंधन और आव्रजन नियंत्रण पर सवाल
एएनआई से बातचीत में थरूर ने कहा कि यदि लोग अवैध रूप से देश में प्रवेश कर रहे हैं या वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी यहां रह रहे हैं, तो यह सीमा प्रबंधन और आव्रजन नियंत्रण में खामियों की ओर इशारा करता है। उन्होंने सवाल उठाया, “अगर अवैध अप्रवासी हमारे देश में आ रहे हैं, तो क्या यह हमारी विफलता नहीं है? क्या हमें अपनी सीमाओं को और बेहतर तरीके से नियंत्रित नहीं करना चाहिए?”
सरकार को कार्रवाई का अधिकार
थरूर ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में सरकार को पूरी तरह कार्रवाई का अधिकार है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अवैध रूप से देश में रह रहा है या वीजा अवधि के बाद भी रुका हुआ है, तो सरकार उसे निर्वासित कर सकती है। ऐसे मामलों में सरकार को अपना काम करने दिया जाना चाहिए।
मानवीय और संतुलित दृष्टिकोण की जरूरत
कानून के शासन पर जोर देते हुए थरूर ने कहा कि संवेदनशील सीमा पार मामलों में संतुलित और मानवीय दृष्टिकोण भी जरूरी है, खासकर जब राजनीतिक और मानवीय पहलू जुड़े हों।
शेख हसीना के मामले पर बयान
थरूर ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत में रहने की अनुमति देने के फैसले का बचाव करते हुए इसे मानवीय मूल्यों पर आधारित कदम बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने उन्हें वापस न भेजकर “सही मानवीय भावना” दिखाई है और भारत के साथ उनके लंबे संबंधों व विश्वसनीय मित्र की भूमिका का उल्लेख किया।
निर्वासन और प्रत्यर्पण की जटिल प्रक्रिया
उन्होंने कहा कि निर्वासन और प्रत्यर्पण से जुड़े मामले संधियों, अपवादों और जटिल कानूनी ढांचे के तहत आते हैं, जिनकी सावधानीपूर्वक समीक्षा जरूरी होती है। थरूर के अनुसार, ऐसे फैसले सरकार के विवेक पर छोड़े जाने चाहिए, क्योंकि हर कानूनी पहलू को गहराई से समझना आवश्यक है।