राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव ने गुरुवार को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को गंभीर आपराधिक आरोपों में पद से हटाने के प्रस्तावित विधेयक को लेकर भाजपा नीत केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इस कदम को “यातना की रणनीति” करार दिया और दावा किया कि यह विधेयक खासतौर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को निशाना बनाने के लिए लाया जा रहा है।
नीतीश-नायडू को ब्लैकमेल करने का आरोप
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस विधेयक का इस्तेमाल अपने सहयोगी दलों के नेताओं को ब्लैकमेल करने के लिए कर रही है। उन्होंने कहा,
“वे इसे नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू के लिए ला रहे हैं। उनका एक ही काम है – ब्लैकमेल करना। अगर ईडी मामलों में पीएमएलए लगाया जाता है, तो जल्दी जमानत नहीं मिल सकती। यह देश बनाने की नहीं बल्कि बर्बाद करने की रणनीति है।”
अन्य नेताओं का भी किया ज़िक्र
राजद नेता ने कहा कि यह कानून सिर्फ नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू ही नहीं, बल्कि अन्य नेताओं को डराने के लिए भी लाया जा रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का नाम लिया, जिन्हें जेल भेजा गया था लेकिन बाद में बरी कर दिया गया।
लोकतंत्र को कमज़ोर करने का आरोप
तेजस्वी यादव ने इस विधेयक को लोकतंत्र पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम केवल नेताओं को नियंत्रित करने और विपक्षी दलों पर दबाव बनाने की साज़िश है।
“यह विधेयक लोकतंत्र को कमज़ोर करने और विशिष्ट नेताओं को निशाना बनाने के लिए लाया जा रहा है। भाजपा नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू पर दबाव बनाना चाहती है ताकि टिकट बंटवारे में भी अपने नेताओं को शामिल करा सके।”