विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बुधवार को अमेरिका में एफबीआई निदेशक काश पटेल और राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड से अलग-अलग बैठकें कीं। इन बैठकों में आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध जैसे मुद्दों पर भारत-अमेरिका सहयोग की सराहना की गई।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ से स्पष्ट हुआ भारत का संदेश
जयशंकर ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करेगा। वाशिंगटन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा,“आतंकी अपराधियों को जवाबदेह ठहराना और न्याय के कटघरे में लाना आवश्यक है।”उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भारत पर आतंकी हमला होता है तो हम हमलावरों, उनके समर्थकों, वित्तपोषकों और सहयोगियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करेंगे।
‘क्वाड’ देशों की आतंकवाद पर संयुक्त चेतावनी
क्वाड देशों – भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान – के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर सीमा पार आतंकवाद की कड़ी निंदा की। इसमें 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले की साजिश रचने वालों और उनके मददगारों को बिना देरी के सजा दिलाने की मांग की गई।
बयान में सभी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों से सहयोग बढ़ाने की अपील की गई ताकि अंतरराष्ट्रीय कानून और सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के तहत कार्रवाई हो सके।
सुरक्षा परिषद का भी कड़ा रुख
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करते हुए इसके लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाने की आवश्यकता पर बल दिया।
भारत ने इस हमले के जवाब में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू कर पाकिस्तान और PoK स्थित आतंकी ढांचों को निशाना बनाया।
इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने ली थी, जिसमें 26 लोग मारे गए थे।
आतंकवाद के खिलाफ भारत का वैश्विक संदेश
जयशंकर ने कहा कि भारत ने अपने वैश्विक साझेदारों को बताया है कि“भारत आतंकवाद से दशकों से जूझ रहा है और अब हम इसका दृढ़ता से जवाब देने के लिए संकल्पित हैं। हमें अपनी सुरक्षा का अधिकार है।”
अमेरिका से व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा पर भी चर्चा
जयशंकर की अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ भी व्यापक द्विपक्षीय चर्चा हुई।
इस बैठक में व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और गतिशीलता जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
उन्होंने अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट से भी अलग-अलग मुलाकातें कीं।
अमेरिकी ऊर्जा नीति पर भारत की चिंता
रूसी तेल आयात पर अमेरिकी प्रस्तावित 500% शुल्क को लेकर जयशंकर ने कहा कि“भारतीय दूतावास और अधिकारी अमेरिकी सांसद ग्राहम के संपर्क में हैं और भारत की ऊर्जा सुरक्षा की चिंताओं से उन्हें अवगत करा दिया गया है।”