पटना में वक्फ संशोधन अधिनियम पर तेजस्वी यादव के विवादास्पद बयान को लेकर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि राजद और समाजवादी पार्टी जैसी पार्टियां अब समाजवाद नहीं, बल्कि ‘नमाजवाद’ को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने कहा कि ये पार्टियां गरीब और शोषित मुसलमानों की आवाज बनने के बजाय, केवल तुष्टीकरण की राजनीति कर रही हैं।
“वक्फ कानून को कूड़ेदान में फेंक देंगे” बयान पर घिरी राजद
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि लोकतंत्र के सबसे काले अध्याय, आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर जब देश संविधान की रक्षा की बात कर रहा था, उस समय पटना के गांधी मैदान में तेजस्वी यादव का यह कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि वक्फ कानून को कूड़ेदान में फेंक देंगे। यह कानून संसद से पारित हुआ है और न्यायालय में विचाराधीन है। इसका सीधा अर्थ है कि तेजस्वी न तो संसद का सम्मान करते हैं और न ही न्यायपालिका का।
“वक्फ शब्द कुरान में नहीं, यह मौलवियों की रचना है”
भाजपा नेता ने दावा किया कि “वक्फ” जैसा कोई शब्द कुरान में नहीं है। उन्होंने कहा, “इस्लाम में देने और ज़कात की बात है, संग्रह करने की नहीं। वक्फ की अवधारणा मौलवियों की बनाई हुई है, जो संविधान की आत्मा के विपरीत है।” उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल संविधान को धर्मनिरपेक्ष दस्तावेज़ से ‘मौलवियों की स्क्रिप्ट’ में बदलने की कोशिश कर रहे हैं।
“समाजवाद की जगह नमाजवाद लागू करना चाहते हैं”
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि ये पार्टियां समाजवाद के नाम पर कठमुल्लावाद की राजनीति कर रही हैं। उन्होंने कहा, “ये सच्चे समाजवादी नहीं, ‘पक्के नमाजवादी’ हैं, जिन्हें शरिया कानून लाने की ललक है।” उन्होंने जनता को सचेत करते हुए कहा, “इंडी गठबंधन सत्ता में आया तो संविधान को कूड़ेदान में डालकर शरिया लागू करने की कोशिश करेगा।”
शाहबानो केस का उदाहरण देते हुए विपक्ष पर हमला
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब 1985 में केंद्र सरकार के पास 400 से ज्यादा सीटें थीं, तब शाहबानो मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटकर शरिया को संविधान से ऊपर रखा गया। उन्होंने कहा, “विपक्ष अगर सत्ता में आता है (जो संभव नहीं), तो फिर वही दौर लौट सकता है।”
संविधान की रक्षा बनाम तुष्टीकरण की राजनीति
सुधांशु त्रिवेदी ने अंत में कहा कि एक तरफ भाजपा है जो बाबा साहब के संविधान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, और दूसरी तरफ इंडी गठबंधन है जो तुष्टीकरण के लिए संविधान की बलि चढ़ा सकता है।