आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इसे हरिशयनी एकादशी और पद्मा एकादशी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं, जिसे चातुर्मास कहा जाता है। इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि नहीं किए जाते।
देवशयनी एकादशी क्यों मनाई जाती है?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब धरती पर पाप और अत्याचार बढ़ने लगे, तो देवताओं ने भगवान विष्णु से मदद की प्रार्थना की। भगवान ने उन्हें बताया कि वे चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाएंगे और उसके बाद अधर्म के नाश के लिए अवतार लेंगे। इसी कारण इस दिन को देवशयन का दिन माना गया, जब भगवान विष्णु क्षीर सागर में शेषनाग की शैय्या पर शयन करते हैं।
देवशयनी एकादशी की पौराणिक कथा (पद्म पुराण से)
राजा मान्धाता के राज्य में एक बार भीषण अकाल पड़ा। दुखी होकर राजा ने महर्षि अंगिरा से इसका समाधान पूछा। महर्षि ने उन्हें आषाढ़ शुक्ल एकादशी का व्रत करने और भगवान विष्णु की उपासना करने को कहा। राजा ने पूरे विधि-विधान से व्रत किया, जिससे राज्य में वर्षा हुई और समृद्धि लौट आई। तभी से यह व्रत संकट निवारण और मनोकामना पूर्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया।
देवशयनी एकादशी पर क्या करें?
ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
भगवान विष्णु की पूजा पीले पुष्पों, तुलसी, और पंचामृत से करें।
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का जाप करें।
तुलसी के पौधे के सामने दीप जलाएं।
ब्राह्मणों, साधु-संतों व जरूरतमंदों को भोजन कराएं और दान करें।
रात्रि जागरण करें और श्रीहरि के भजन-कीर्तन करें।
इस दिन क्या न करें?
चावल, मसूर दाल, प्याज, लहसुन और मांसाहार का सेवन न करें।
झूठ बोलने, क्रोध करने और अपशब्दों से बचें।
बाल कटवाना और नाखून काटना वर्जित माना गया है।
किसी की निंदा या अपमान न करें; यह पाप माना जाता है।
देवशयनी एकादशी 2025 में कब है?
इस वर्ष देवशयनी एकादशी रविवार, 6 जुलाई 2025 को मनाई जाएगी। जो भक्त इस दिन पूरे नियमों के साथ व्रत करते हैं, उन्हें भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और उनके जीवन के कष्ट दूर होते हैं।