घर के बाहर पेड़ के नीचे बच्चे दादाजी के चारों ओर खड़े हो गए। प्लीज, दादाजी हमें कहानी सुनाइए ना, अच्छा सुनाता हूं, पहले सब बैठ जाओ, दादाजी ने कहा।
सभी बच्चे अपनी- अपनी जगह चुन कर बैठ गए। दादाजी ने कहानी कहना शुरू किया। मनोरम नामक वन में एक बहुत ही सुंदर बड़ा सा तालाब था। तालाब चारों ओर से सुंदर वृक्षों व फूल पौधों से घिरा हुआ था।
तालाब में कमल खिले हुए हुए थे। एक समय की बात है कि दो मछुआरे मनोरम वन में विश्राम कर रहे थे। तभी उन्होंने देखा कि तालाब में खूब सारी मछलियां हैं।दोनों मछुआरे आश्चर्यचकित होकर बोले,’ हमें आज तक इस तालाब का पता क्यों नहीं चला।’ काफी समय हो गया था। संध्या हो चुकी थी, इसलिए दोनों आपस में बात करते हुए वहां से लौट गए कि कल आकर यहां पर जाल बिछाएंगे।
यह बात तालाब में बैठी तीन मछलियों ने सुन ली, वे आपस में बातें करने लगीं कि अगले दिन मछुआरे आकर यहां जाल बिछाएंगे और हम सभी को पकड़ लेंगे। क्यों न हम लोग तालाब से निकलकर नदी में चलें?
उनमें से एक मछली आलसी थी। उसने सुझाव को स्वीकार नहीं किया और कहा कि जब मछुआरे आएंगे तब हम कहीं छुप जाएंगे। अगले दिन जैसे ही मछुआरा आया, एक मछली छलांग लगाकर नदी में चली गई।
सभी बच्चे अपनी- अपनी जगह चुन कर बैठ गए। दादाजी ने कहानी कहना शुरू किया। मनोरम नामक वन में एक बहुत ही सुंदर बड़ा सा तालाब था। तालाब चारों ओर से सुंदर वृक्षों व फूल पौधों से घिरा हुआ था।
तालाब में कमल खिले हुए हुए थे। एक समय की बात है कि दो मछुआरे मनोरम वन में विश्राम कर रहे थे। तभी उन्होंने देखा कि तालाब में खूब सारी मछलियां हैं।दोनों मछुआरे आश्चर्यचकित होकर बोले,’ हमें आज तक इस तालाब का पता क्यों नहीं चला।’ काफी समय हो गया था। संध्या हो चुकी थी, इसलिए दोनों आपस में बात करते हुए वहां से लौट गए कि कल आकर यहां पर जाल बिछाएंगे।
यह बात तालाब में बैठी तीन मछलियों ने सुन ली, वे आपस में बातें करने लगीं कि अगले दिन मछुआरे आकर यहां जाल बिछाएंगे और हम सभी को पकड़ लेंगे। क्यों न हम लोग तालाब से निकलकर नदी में चलें?
उनमें से एक मछली आलसी थी। उसने सुझाव को स्वीकार नहीं किया और कहा कि जब मछुआरे आएंगे तब हम कहीं छुप जाएंगे। अगले दिन जैसे ही मछुआरा आया, एक मछली छलांग लगाकर नदी में चली गई।
आलसी मछली और उसकी एक मित्र भी मछलियों के साथ जाल में पकड़ी गई।
जैसे ही मछुआरा जाल समेटने के लिए आगे बढ़ा तो समझदार मछली ने मरे हुए होने का झूठा नाटक किया। मछुआरे ने मरा हुआ समझकर उस मछली को निकालकर फेंक दिया।
वह मछली अपनी समझदारी का प्रयोग करते हुए उछल कर नदी में भाग गई, किंतु जो आलसी मछली थी, वह जाल में पड़ी रही। मछुआरों ने उसे ले जाकर बाजार में बेच दिया। दादाजी बोले, हमेशा अपनी बुद्धि का प्रयोग करना चाहिए और हमें आलसी नहीं बनना चाहिए।
किसी भी परिस्थिति में कभी घबराएं नहीं, बुद्धि का प्रयोग करके संकट से बच सकते हैं। कहानी सभी बच्चों को बहुत पसंद आई, ताली बजाते हुए बच्चे दादाजी के साथ घर के भीतर चले गए।